नई दिल्ली। शेर, बाघ व चीता जैसी बड़ी बिल्लियों के मुकाबले मानव बस्तियों पर तेंदुओं के ज्यादा हमलावर होने की घटनाओं को देखते हुए केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय ने तेंदुओं के बेहतर प्रबंधन की दिशा में पहल तेज की है। ऐसे में वन क्षेत्र से बार-बार बाहर आने वाले और मानव बस्तियों पर हमला करने वाले तेंदुओं को पकड़कर अब चिड़ियाघरों या फिर रेसक्यू सेंटर में रखने की तैयारी है। माना जा रहा है कि इसे लेकर राज्यों के साथ मिलकर जल्द ही एक साझा योजना घोषित की जा सकती है।
तेंदुओं के बेहतर प्रबंधन को लेकर यह पहल उस समय शुरू हुई है, जब मानव बस्तियों पर उनके हमले या आने के मामले लगातार सामने आ रहे है। अकेले जून महीने में तेंदुओं के हमले के कई चर्चित मामले सामने आए है। इनमें आइआइटी बांबे के परिसर में तेंदुए के घुसने और उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी में एक सात वर्षीय बच्चे के मारने व बहराइच में एक बस्ती में घुसकर एक वनकर्मी सहित सात लोगों को घायल करने जैसे प्रमुख मामले शामिल है। वन्यजीव विशेषज्ञों के मुताबिक शेर, बाघ और चीता के भी मानव बस्तियों में दाखिल होने की घटनाएं सामने आती रहती है, लेकिन तेंदुआ इनमें सबसे आगे है।
मंत्रालय से जुड़े सूत्रों की मानें तो यही वजह है कि इनसे निपटने के लिए अब राज्यों के साथ मिलकर एक साझा योजना पर काम किया जा रहा है। जिसमें प्रभावित राज्यों में कैंपा ( कंपनसेटरी एफास्टेशन फंड मैनेजमेंट एवं प्लानिंग अथारिटी) फंड से एक रेसक्यू सेंटर बनाने की योजना बनाई गई है। जहां हमलवार तेंदुओं को पकड़कर रखा जाएगा। इसके साथ ही देश भर के चिड़ियाघरों की क्षमता का भी आकलन कराया जा रहा है। सूत्रों की मानें तो ऐसे सभी तेंदुओं को पहले चिड़ियाघरों में ही रखा जाएगा। माना जा रहा है कि इससे तेंदुआ भी सुरक्षित रहेगा और मानव बस्तियों में आने की घटनाएं भी कम होगी। गौरतलब है कि गुजरात व उत्तराखंड जैसे राज्यों में कुछ जगहों पर तेंदुओं से निपटने के लिए छोटे-छोटे रेसक्यू सेंटर बनाए गए है।
देश में अभी करीब 13874 तेंदुए है मौजूद
मौजूदा समय में देश के बाघ अभयारण्य वाले लगभग सभी 18 राज्यों में तेंदुए पाए जाते है। साथ ही अभी इनकी संख्या भी करीब 13,874 है। इनमें सबसे अधिक तेंदुए मध्य प्रदेश में पाए जाते है। जबकि दूसरे नंबर पर महाराष्ट्र, तीसरे नंबर पर कर्नाटक है। अन्य जिन राज्यों में इनकी बड़ी आबादी पायी जाती है, उनमें तमिलनाडु, छत्तीसगढ़, राजस्थान, उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश शामिल है।