सोने का गढ़, ब्लू जींस और केबल कार… कैसे पड़ा ‘सैन फ्रांसिस्को’ का नाम? दिलचस्प है इसकी कहानी…

दुनिया के सबसे प्रभावशाली शहरों में गिना जाने वाला सैन फ्रांसिस्को की कहानी बेहद दिलचस्प है। करीब ढाई सौ साल पहले समुद्र के किनारे एक छोटी सी बस्ती से शुरू हुआ सफर आज आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के नए दौर की दिशा यही शहर तय करता है।

29 जून 1776 को स्पेनिश सैनिकों और मिशनरियों ने यहां एक सैन्य चौकी और मिशन की स्थापना की। इसी दिन सैन फ्रांसिस्को की नीव पड़ी। गोल्डन गेट ब्रिज इसकी पहचान है और सिलिकॉन वैली इसकी ताकत है।

स्पेनिश सेना का गढ़ रहा

यूरोपीय लोगों के आने से हजारों साल पहले यहां ओहलोनी और कोस्ट मिवोक समुदाय रहते थे। वे शिकार, मछली पकड़ने और जंगल से मिलने वाले संसाधनों पर निर्भर थे। 18वीं सदी में स्पेश को आशंका थी कि ब्रिटेन और रूस इस क्षेत्र पर कब्जा कर सकते हैं। इसी वजह से उसने यहां प्रेसीडियो ऑफ सैन फ्रांसिस्कोल नाम का सैन्य किला और मिशन सैन फ्रांसिस्को दे असीस की स्थापना की। आसपास बड़ी मात्रा में उगने वाली एक जड़ी-बूटी के कारण इस बस्ती का नाम यरबा बुएना पड़ गया।

एक नाविक ने रखी नींव

1821 में मैक्सिको ने स्पेन से आजादी हासिल की तो यह इलाका उसके अधीन हो गया। निजी व्यापार को बढ़ावा मिलने के साथ यहां विदेशी जहाज आने लगे। 1822 में ब्रिटिश नाविक विलियम ए. रिचर्डसन यहां बस गए और उन्होंने खाड़ी किनारे पहला स्थायी घर बनाया। उनके प्रयासों से यरबा बुएना पश्चिमी तट का उभरता हुआ व्यापारिक केंद्र बन गया।

1846 में मैक्सिको से युद्ध के बाद अमेरिकी नैसेना ने इस पर कब्जा कर लिया। 1847 में अमेरिकी प्रशासक वॉशिंगटन बार्टलेट ने इसका नाम बदलकर सैन फ्रांसिस्को कर दिया।

गोल्ड रश से बढ़ी आबादी

24 जनवरी 1848 को कैलिफोर्निया से सटर्स मिल में सोना मिलने की खबर ने सैन फ्रांसिस्को की किस्मत बदल दी। 1849 तक अमेरिका, यूरोप, दक्षिण अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और चीन के हजारों लोग कैलिफोर्निया पहुंचने लगे। इन्हें बाद में ‘फोर्टी नाइनर्स’ कहा गया।

समुद्री मार्ग से आने वाला अधिकांश लोग सबसे पहले सैन फ्रांसिस्को उतरते थे। कुछ ही महीनों में यह छोटा-सा कस्बा दुनिया का सबसे व्यस्त बंदरगाहों में बदल गया और आबादी करीब एक हजार से बढ़कर 25 हजार पहुंच गई। गोल्ड रश के दौरान छोड़े गए कई जहाजों को बाद में मिट्टी से भरकर उसने ऊपर सड़कें और इमारतें बना दी गईं, जिनके अवशेष आज भी शहर के नीचे मिलते हैं।

सैन फ्रांसिस्को ने दुनिया को क्या दिया?

  • ब्लू जींस: 1853 में लेवी स्ट्रॉस ने गोल्ड रश के दौरान मजदूरों की फटी पेंट देखकर यहीं ब्लू जींस बनाई। यह दुनियाभर में मशहूर गुईं और लिवाइस कंपनी का आधार बनीं।
  • केबल कार: 1873 में इंजीनियर एंड्रयू हैलिडी ने यहां दुनिया की पहली सफल केबल कार सेवा शुरू की।
  • संयुक्त राष्ट्र चार्टर: 1945 में यहीं पर संयुक्त राष्ट्र चार्टर पर हस्ताक्षर हुए। 24 अक्तूबर 1945 को इसके लागू होने के साथ ही संयुक्त राष्ट्र की औपचारिक स्थापना हुई।

1937 में सैन फ्रासिस्को खाड़ी पर गोल्डन ब्रिज का निर्माण पूरा हुआ। यह उस समय दुनिया का सबसे लंबा सस्पेंशन ब्रिज था।

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