सारण, सिवान और गोपालगंज के किसानों के लिए महत्वपूर्ण विशेष गंडक सिंचाई परियोजना में अब तेजी दिखाई देने लगी है। करीब 11 हजार करोड़ रुपये की इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत नहरों के आधुनिकीकरण, सिंचाई क्षमता विस्तार और जल प्रबंधन व्यवस्था को मजबूत बनाने का कार्य लगातार आगे बढ़ रहा है।
परियोजना का उद्देश्य किसानों को वर्षभर सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध कराना तथा खेती को अधिक लाभकारी बनाना है।
जल संसाधन विभाग के आंकड़ों के अनुसार, परियोजना के तहत अब तक लगभग 99,300 हेक्टेयर क्षेत्र में पुरानी सिंचाई क्षमता का जीर्णोद्धार किया जा चुका है। वहीं, 74,900 हेक्टेयर क्षेत्र में नई सिंचाई क्षमता विकसित की गई है। इस प्रकार कुल 1.74 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में विभिन्न प्रकार के कार्य पूरे किए जा चुके हैं।
पूरी योजना के अंतर्गत तीनों जिलों में 1.58 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में नई सिंचाई क्षमता विकसित करने तथा 1.47 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में पुरानी सिंचाई व्यवस्था का पुनरुद्धार करने का लक्ष्य निर्धारित है।
परियोजना का सबसे महत्वपूर्ण पहलू आधुनिक तकनीक आधारित जल वितरण व्यवस्था है। योजना के तहत सारण को देश के पहले ‘स्मार्ट कमांड एरिया’ के रूप में विकसित करने की तैयारी की जा रही है। इसके अंतर्गत नहरों के साथ भूमिगत एचडीपीई एवं पीवीसी पाइपलाइन नेटवर्क विकसित किया जाएगा।
साथ ही पांच से दस हेक्टेयर के कृषि क्लस्टरों पर डिजिटल स्मार्ट वाटर आउटलेट लगाए जाएंगे, जहां किसान अपने किसान कार्ड के माध्यम से निर्धारित समय के लिए सिंचाई का पानी प्राप्त कर सकेंगे। इससे पानी की बर्बादी पर रोक लगेगी और जल वितरण व्यवस्था अधिक पारदर्शी एवं प्रभावी बनेगी।
सारण के सांसद राजीव प्रताप रुडी इस परियोजना को गति दिलाने के लिए लगातार प्रयास किए हैं। उन्होंने लोकसभा में गंडक परियोजना की जर्जर स्थिति और किसानों को पर्याप्त लाभ नहीं मिलने का मुद्दा उठाया था।
उनका कहना था कि दशकों पुरानी इस परियोजना का लाभ अपेक्षित स्तर तक किसानों तक नहीं पहुंच पाया है। लगातार प्रयासों के बाद परियोजना को तकनीकी एवं आर्थिक स्वीकृति मिली, जिसके बाद इसके विस्तार और आधुनिकीकरण का मार्ग प्रशस्त हुआ।
बनियापुर प्रखंड के कन्हौली, साहजीतपुर, पिपरा, कराह और बनियापुर मध्य सहित कई पंचायतों को इस परियोजना में शामिल किया गया है। परियोजना का लाभ विशेष रूप से उन क्षेत्रों को मिलने की उम्मीद है, जहां अब तक नहर का पानी नियमित रूप से नहीं पहुंच पाता था। अधिकारियों का लक्ष्य किसानों को 365 दिन सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराने की व्यवस्था विकसित करना है।
परियोजना के तहत सारण मुख्य नहर तथा उसकी शाखाओं और उपशाखाओं की गाद सफाई, लाइनिंग और पुरानी संरचनाओं के पुनर्निर्माण का कार्य भी जारी है।
इसके अलावा, एस्केप चैनलों को मजबूत किया जा रहा है तथा गंडक तटबंधों के सुदृढ़ीकरण पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इससे एक ओर सिंचाई व्यवस्था बेहतर होगी तो दूसरी ओर मानसून के दौरान बाढ़ से फसलों और गांवों की सुरक्षा भी सुनिश्चित की जा सकेगी।
कृषको का मानना है कि परियोजना पूरी होने के बाद किसानों की सिंचाई लागत में कमी आएगी, भूजल पर निर्भरता घटेगी और फसल उत्पादन में वृद्धि होगी। इससे सारण, सिवान और गोपालगंज की कृषि अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है।
फिलहाल, किसानों की नजरें परियोजना के शेष कार्यों में तेजी और आधुनिक जल वितरण प्रणाली के जल्द क्रियान्वयन पर टिकी हैं।
किसानों को मिलने वाले प्रमुख लाभ
- पूरे वर्ष सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराने का लक्ष्य
- किसान कार्ड के जरिए डिजिटल प्रणाली से पानी प्राप्त करने की सुविधा
- 1.58 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में नई सिंचाई क्षमता का विकास
- 1.47 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में पुरानी व्यवस्था का पुनरुद्धार
- पाइपलाइन के माध्यम से दूरस्थ खेतों तक जलापूर्ति
- सिंचाई लागत में कमी और फसल उत्पादन में वृद्धि