स्मार्टफोन यूजर स्वाभाविक तौर पर स्ट्रीमिंग सर्विसेज, पॉडकास्ट से लेकर फूड डिलीवरी, फिटनेस एप तक अनेक सब्सक्रिप्शन ले लेते हैं। जब आप कुछ भी सब्सक्राइब करते हैं तो नाम और ईमेल के साथ-साथ एड्रेस, क्रेडिट कार्ड जैसी संवेदनशील जानकारियां भी अक्सर साझा कर देते हैं। ऐसे में आपका डेटा आपके ही खिलाफ इस्तेमाल हो सकता है, क्योंकि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म, वेबसाइट या कंपनी डेटाबेस हर समय स्कैमर्स के निशाने पर होते हैं। इससे बचने के लिए कुछ बातों का ध्यान रखना आवश्यक है।
गैर जरूरी सब्सक्रिप्शन हटाएं
न्यूजलेटर्स और प्रमोशनल ईमेल को बीच बीच में अनसबस्क्राइब करते रहना चाहिए। जिस मेल को आप महीनों तक ओपन नहीं करते हैं, उसे मेल बॉक्स में जमा करते रहने का कोई औचित्य नहीं है। इसके लिए जीमेल के बिल्ट इन सब्सक्रिप्शन मैनेजमेंट टूल की मदद भी ले सकते हैं। पेड सब्सक्रिप्शन के लिए बैंक और क्रेडिट कार्ड स्टेटमेंट भी चेक करते रहना चाहिए।
पुराने अकाउंट को डिलीट करें
सब्सक्रिप्शन खत्म होने के बाद भी ज्यादातर वेबसाइट आपके डेटा को सेव करके रखती हैं, यानी आपका डेटा खतरे से खाली नहीं है। इससे बचने के लिए अपने पुराने अकाउंट डिलीट करना बेहतर होता है। इसके लिए मैकएफी के ऑनलाइन अकाउंट क्लीनअप टूल्स आदि का प्रयोग किया जा सकता है। इससे भूले हुए अकाउंट को भी सुरक्षित रख पाएंगे।
सब्सक्राइब करने से पहले सतर्कता
- पहले यह तय करें कि आपको कितनी जरूरत है। जैसे, किसी न्यूजलेटर को कितना ओपन करते हैं, वह कितना महत्वपूर्ण है, यह जानना जरूरी है
- किसी प्रोडक्ट या सर्विस सब्सक्रिप्शन के लिए यह तय कर लें कि पेमेंट संबंधी जानकारियों को साझा करना कितना तार्किक होगा।
- यूआरएल के एसएसएल एन्क्रिप्शन को जांचना जरूरी है। यह वेबसाइट की सुरक्षा की बेसिक जरूरत होती है।
- आप यूआरएल की शुरुआत में “https” प्रीफिक्स देखकर यह तय कर सकते हैं कि एसएसएल का इस्तेमाल हो रहा है।
- वेबसाइट के बारे में रिसर्च करें। साइट की साख जानने के लिए उसके रिव्यूज और उससे संबंधी स्कैम को सर्च करें।